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शिव ‘राज’ में भूख हड़ताल पर बैठे किसानों का ऐलान- हमारे पैसे नहीं मिले तो दे देंगे जान

खरीदी केंद्र के सचिव ने किसानों की फसल की खरीदी को निरस्त कर दिया है

कुछ दिन पहले ही मध्यप्रदेश के हिस्से वाले बुंदेलखंड में राहत राशि के लिए अनशन पर बैठे एक किसान की मौत हो गई थी। वहीं प्रशासन इस बात के लिए राज़ी ही नहीं था कि किसान की मौत अनशन की वज़ह से हुई है। मौत के बाद किसान का पोस्टमार्टम भी नहीं करवाया गया, और मामले को रफा-दफा कर दिया गया।

अब एक बार फिर शिवराज सरकार में किसानों को अपने पैसे के लिए ही भूख हड़ताल पर जाना पड़ रहा है। दरअसल, भींड ज़िले के 34 किसानों को सरकार के खरिदी केंद्रों पर फसल बेचे दो महीने हो गए लेकिन फसल का भुगतान अब तक नहीं किया गया। आर्थिक तंगी से परेशान किसान ज़िला के सहकारी केंद्रीय बैंक के दरवाजे पर भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं। उनकी मांग है कि जब तक सरकार उनका पैसा नहीं देती तब तक हड़ताल जारी रहेगा।

ईनाडु इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार इस वर्ष 18 अप्रैल से 22 अप्रैल तक सेवा सह संस्था मछंड पर बनाए गए खरीदी केंद्र पर इन किसानों ने अपनी गेहूं की फसल बेची थी। लेकिन खरीदी का पैसा किसानों के खाते में अब तक नहीं आया। अब किसानों पर आर्थिक संकट गहराने लगा है।

गौरतलब है कि 34 किसानों का 40 लाख रुपये सरकार के पास अभी बकाया है। किसानों के पास पैसे नहीं होने के कारण आगे की फसल भी वे नहीं लगा पा रहे हैं। किसानों का कहना है कि अगर उनका पैसा नहीं मिला तो वे अपनी जान दे देंगे।

कुछ दिन पहले किसान समिति ने प्रशासन से आंदोलन की अनुमति मांगी थी, पर प्रशासन ने अनुमति देने से मना कर दिया था।

अब किसान संघर्ष समिति भी भूख हड़ताल पर बैठे किसानों के समर्थन में उतर आई है। किसान नेता संजीव बरुआ का कहना है कि जब तक किसानों का हक का पैसा नहीं मिल जाता तब तक वे किसानों के साथ संघर्ण करते रहेंगे। वहीं बैंक शाखा के प्रबंधक का कहना है कि खरीदी केंद्र के सचिव ने किसानों की फसल की खरीदी को निरस्त कर दिया है इसलिए किसानों का भुगतान संभव नहीं है।

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