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मध्यप्रदेश सरकार की उदासीनता के चपेट में किसान एक बार फिर

महीनों से नहीं मिल रही किसानों को भावांतर भुगतान योजना के तहत तय राशि

मध्यप्रदेश सरकार का किसानों के प्रति उदासीन रवैया एक बार फिर देखने को मिल रहा है। सरकार के द्वारा चलाई जा रही भावांतर भुगतान योजना यहां के किसानों के गले की फांस बन गई है। इस योजना के तहत कई महीने से किसानों को पैसा भुगतान नहीं हो पाया है। किसान को अपने ही पैसों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।

भावांतर योजना के तहत मध्यप्रदेश सरकार बिना एमएसपी वाले फसलों पर उचित मूल्य और एमएसपी मूल्य के बीच अंतर वाली राशि को किसानों को भुगतान करती है। लेकिन किसान संगठन ‘आम किसान यूनियन’ के अनुसार किसानों का 22 हज़ार करोड़़ रुपए सरकार के पास अटका है। वो अपने पैसों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैंं।

हिंद किसान के एक रिपोर्ट के अनुसार नरसिंहपुर के किसान चन्द्रभान को इस योजना के तहत सरकार को बेची गई उड़द के 25 हज़ार के लिए पिछले 9 महीनों से इंतजार करना पड़ रहा है। किसानों ने ज़िला अधिकारी से लेकर कृषि विभाग और यहां तक कि सीएम हेल्पलाइन में भी मदद की गुहार लगाई पर कहीं राहत नहीं मिल रही है।

गौर करने की बात यह है कि सरकार का दावा है की भावांतर योजना किसानों की मदद के लिए चलाई गई है पर सरकारी उदासीनता ने इसके स्वरूप को ही बदल रखा है। किसानो को अपने पैसों के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है।

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