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मध्यप्रदेश में बढ़ रहीं यौन हिंसा, महिला सुरक्षा पर ध्यान नहीं दे रही सरकार

दो साल से महिलाओं के काम करने वाले जगह पर नहीं बन पाई लैंगिक अपराध रोकने के लिए समिति

एक तरफ मध्यप्रदेश में महिलाओं के प्रति यौन हिंसा में बढ़ोतरी हो रही है और वहीं राज्य सरकार इसके लिए कोई ठोस कदम उठाती नज़र नहीं आ रही है। राज्य में कार्यस्थल पर महिलाओें का लैंगिक उत्पीड़न रोकने के लिए आंतरिक परिवाद समिति का गठन अबतक नहीं हो पाया है जबकि नियम के अनुसार इसका गठन दो साल पहले ही हो जाना चाहिए था।

पाठकों को ज्ञात हो कि महिला आयोग की अनुशंसा पर लैंगिक उत्पीड़न अधिनियम 2013 की धारा 4 में एक प्रावधान किया गया है जिसके अनुसार महिलाओं के कार्य करने वाले ऐसे स्थान जहां 10 से अधिक कर्मचारी हों वहाँ आंतरिक परिवार समिति का गठन करना अनिवार्य है।

नईदुनिया की एक रिपोर्ट के अनुसार नवंबर 2016 तक इसका गठन हो जाना चाहिए था लेकिन राज्य सरकार के निर्णय के बाद भी ज़िले में पिछले दो सालों से कई सरकारी और निजी कार्यस्थलों में अबतक इसका गठन नहीं किया गया है।

राज्य महिला आयोग के अध्यक्ष लता वानखेड़े का कहना है कि हर ज़िले में एक स्थानीय परिवाद समिति के गठन का प्रावधान है। इसके बावजूद यदि कार्यस्थलों पर इसका पालन नहीं किया जा रहा है तो ज़िले के सशक्तिकरण अधिकारी को इस पर कार्यवाही करने का अधिकार है। राज्य महिला आयोग शासन को पत्र लिखकर इसका कठोरता से पालन करवाने के लिए अनुशंसा करेगी।

मध्यप्रदेश में हाल-फिलहाल में महिलाओं के प्रति यौन हिंसा में काफी इज़ाफा हुआ है। इसके बाद महिला सुरक्षा को लेकर प्रशासन की यह उदासीनता काफी चिंतनीय है।

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